Tuesday, July 30, 2013


मैंने ये कवितायेँ तब लिखी थी जब मैं बारवी कक्षा में पढती थी !
आज करीब २५ वर्षो के बाद मैंने अपनी डायरी देखी तो खुद यकीन नहीं हुआ की उस वक़्त मैं कितनी भावुक थी
आज कंप्यूटर युग में मैं अपनी कवितायेँ यहाँ लिख रही हूँ ताकि उस वक़्त को मैं याद करके खुश हो सकती हूँ
मैंने अपनी कविताओं में कोई भी एडिटिंग नहीं की है क्योंकि ये सब शब्द मेरे समय के साथ बंधे हुए है
पढकर हंसी भी आती है और आश्चर्य भी होता है   पापा मम्मी पर कविता लिखी थी तो अब लगता है जैसे मेरे बच्चे मेरे लिए ये सब विचार रखते होंगे
मुझे  अपनी कविताओ पर शाबाशी नहीं लेनी है क्योंकि स्कूल छोड़ते वक़्त मुझे फेयरवेल पार्टी में एक कैप्शन मिल गया था" poetess at heart " फिर मैं सबकुछ भूल गई और ज़िन्दगी के दूसरे  पड़ाव पर चलती चली गई
उन्ही खूबसूरत यादों के साथ , बचपन जो मैंने अपने मम्मी पापा के साथ बिताया , आज ख़ुशी ख़ुशी यहाँ  प्रकाशित करती हूँ



Monday, July 29, 2013

आदरनिये पापा जी एवं मम्मी जी को 


खुशियों का उपहार लेकर आयी है तीन फर  वरी ,
मनाने मेरे पापा मम्मी की मैरिज एनिवर्सरी
हर्षोल्लास को बटोर कर आज
बीते हुए समय को कर रहे है याद
हो गए शादी के आज पूरे १८ साल
लिख रहीं हूँ  मैं पापा मम्मी के गुरगान
और आज तक मैंने जितना कुछ जाना
मैंने इन्ही पन्नो पर है लिख डाला
आयिए मिलवाए हम अपने  पापा मम्मी से
फिर पूछिए आप सवाल कोई इनसे,
मम्मी मेरी इतने दयावान
की हर कोई दे इनको, सम्मान ,
और खाए जो इनके हाथों का पकवान
देखिये अगले दिन वही सज्जन यहाँ विराजमान
पर मम्मी की आदत जो गन्दी
झूठ बोलना जो कभी न सीखी ,
घर की कोई भी बात ,जब आ जाये इनके बाज
खोल दे तुरंत  उस ताले का राज़
हिम्मत इनकी है ज्यादा लगती सबसे
कौन करेगा मुकाबला इनसे
बिना डरे कुछ बोलती है , करती है,
और कुछ बिगड़ जाने पर भी उसी काम की ही ज़बरदस्ती है \
आयिए मिलवाए अपने पापाजी से ,
परतु ध्यान से ,
उन्हें तंग न करें , वो अभी है कुछ काम में जुटे
इनकी तो तारीफ ही कीजिये
क्योंकि घर के सभी काम सीखिये
 और अपनी बचत कीजिये \
हैं वैसे पापा कंजूस बहुत
पर घर में मम्मी जो है खर्चालू
सीखो पहले इनसे धीरज रखना
फिर सभी काम आराम से करना
घर पर बैठे हमेशा समझाते रहते
अपने बच्चो को उनकी गलती का एहसास दिलाते
तभी तो कितने सीधे  है इनके बच्चे
जो कभी नहीं पापा से डरते
हाँ पापा को गुस्सा ज़रा जल्दी आता है
पर खुद उनको इसका एहसास होता  है
और अतः जल्दी छू मंतर  हो जाता है
मेरे पापा मम्मी है कितने अच्छे
मेरे जितने भी है भाव व्यक्त होते
लिख डाले है मैंने आज कुछ
एक कविता ही बनाके /

Friday, July 12, 2013

दिन्नांक चौबीस जनवरी छयासी


मान गए हम ,मान जाइए आप
करना ही पड़ेगा आपको यकीन
यही कि मम्मी है मेरी एक
चलती फिरती कामकाजी मशीन

सूर्योदय से पहले  सोकर उठती हैं
फिर र्सुबह का स्वागत शांत दिमाग से करती हैं ,
पलक झपकते ही सबके लिए गरम गरम "बेड टी" हाज़िर करती हैं ,
सबको सोते देखकर मन  गुस्से में उबलता है
जैसे कोई ज्वाला मुखी फटने से पहले , हौले हौले  खौलता है

परन्तु, परन्तु उस समय उनका मुंह बंद रहता है
फिर तो पापा जी मम्मी की  बडबड से डरकर
दूध का डिब्बा लेकर ,लम्बी दौड़ लगा पड़ते हैं
थोड़ी ही देर में दूध हाज़िर कर देते है

मम्मी का चेहरा शांत देखकर
मुख पर मुस्कान ले आते है
परतु वो मुस्कान पल भर के लिए ही होती है
क्योंकि मम्मी अचानक गुस्से में फड़कती हैं

खाना बनाकर , गुस्सा मिलाकर , तीखी चिल्लाहट के साथ
टिफ़िन का डब्बा पकडाती हैं
 और फिर देखिये तो उनके बच्चो  की शामत  आती है

बच्चे उनके इतने आलसी की पूछिए मत
कामचोर और आलसीपने की भी होती है हद
वे बिस्तर पर विराजमान रहकर
मम्मी के कार्यो का नज़ारा देखकर ,
जुम्हाई लेते हैं और वे बिस्तर पर पड़े पड़े नींद को ही बेहतर कार्य समझते है

बस यहीं मशीन तेज़ी से चालू  होती है
 मम्मी बस एक ही आवाज़ में एक ही सुर में चिल्ला चिल्ला कर सारे
काम कर डालती है

एक काम करती हैं दुगुना चिल्लाती है
मानो डांट  से मम्मी रुपी मशीन चलती है
सुबह का कार्य निबटा कर सज सवर कर अवश्य बैठती हैं
बस आईने के सामने ही एक खूबसूरत मुस्कराहट पेश करती हैं

हम तो उनको मुस्कुराते देख कभी कभी ही देखते हैं
परतु फिर अचानक डांट  खाने के लिए तैयार रहते हैं

फिर मम्मी का योगाभ्यास शुरू हो जाता है
आधे ही घंटे  में पूरा अभ्यास हो जाता है
किसी को पता ही नहीं चलता और दोपहर का खाना तैयार हो जाता है
परन्तु  उस समय गुस्से की मिलावट कम होती है क्योंकि
योग करने से दिमाग की शान्ति होती है

शाम हो जाती है लालिमा छा जाती है
मम्मी मेरी सज सवर कर बैठ जाती है
क्लब में इनाम पाने के लिए वो जल्दी क्लब के लिए पापा साथ
रवाना हो जाती है
वापस आकर , मुस्कुराकर,फिर किचन में घुस जाती हैं
बिना कहे कुछ खाना बनाकर ले आती हैं

इस समय तो मुख पर शांत झलगता है
परन्तु घर  में सबका दिल तब भी धड़कता है
मशीन  अब थककर चूर हो जाती है
उसे शायद आराम की महसूस होती है
इसलिए वो गहरी निद्रा में हो जाती हैं
पर इतना ही नहीं नींद में भी वो काम करने का कवाब देखती है , फिर रात में एकाएक
हडबडा कर उठ जाती हैं, यही कहती है
मुझे काम करना है

अरे मम्मी इतना भी क्या काम
अरे ज़िन्दगी में करना ही है तो
फिर मौज मस्ती करो आराम
ये शब्द उनकी ही बेटी , हिम्मत के साथ उनको कहती है