मैंने ये कवितायेँ तब लिखी थी जब मैं बारवी कक्षा में पढती थी !
आज करीब २५ वर्षो के बाद मैंने अपनी डायरी देखी तो खुद यकीन नहीं हुआ की उस वक़्त मैं कितनी भावुक थी
आज कंप्यूटर युग में मैं अपनी कवितायेँ यहाँ लिख रही हूँ ताकि उस वक़्त को मैं याद करके खुश हो सकती हूँ
मैंने अपनी कविताओं में कोई भी एडिटिंग नहीं की है क्योंकि ये सब शब्द मेरे समय के साथ बंधे हुए है
पढकर हंसी भी आती है और आश्चर्य भी होता है पापा मम्मी पर कविता लिखी थी तो अब लगता है जैसे मेरे बच्चे मेरे लिए ये सब विचार रखते होंगे
मुझे अपनी कविताओ पर शाबाशी नहीं लेनी है क्योंकि स्कूल छोड़ते वक़्त मुझे फेयरवेल पार्टी में एक कैप्शन मिल गया था" poetess at heart " फिर मैं सबकुछ भूल गई और ज़िन्दगी के दूसरे पड़ाव पर चलती चली गई
उन्ही खूबसूरत यादों के साथ , बचपन जो मैंने अपने मम्मी पापा के साथ बिताया , आज ख़ुशी ख़ुशी यहाँ प्रकाशित करती हूँ
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