दिनांक १ -१ -८६
मैंने ये कविता अपनी छोटी बहन पर लिखी थी / हम दोनों में सिर्फ बारह दिनों का अंतर है ,बचपन में हम छुट्टियों मे पटना जाया करते थे और हम दोनों मिलकर बहुत हँसते खेलते /मैंने ये कविताये उस वक़्त लिखी थी और आज मैं यहाँ प्रकाशित कर रही हूँ उसी प्यार और भावुकता के साथ/
प्यारी बहना
बहना की दिन रात याद आये
उसे क्या पता मैंने उसके लिए
कितने आंसू बहाए
ये अश्रुकड़ गिरते मेरे
ख्वाबों में पाकर उसे
झूम उठते हम ख़ुशी से
देखकर हो जाते मग्न प्रसन्न
आवाज़ में उसकी इतना राग
जैसे कोई वीणा की साज़
गर्व है मुझे वो मेरी बहना है
सबसे अलग वो सर्वप्रिय मीना है /
मैंने ये कविता अपनी छोटी बहन पर लिखी थी / हम दोनों में सिर्फ बारह दिनों का अंतर है ,बचपन में हम छुट्टियों मे पटना जाया करते थे और हम दोनों मिलकर बहुत हँसते खेलते /मैंने ये कविताये उस वक़्त लिखी थी और आज मैं यहाँ प्रकाशित कर रही हूँ उसी प्यार और भावुकता के साथ/
प्यारी बहना
बहना की दिन रात याद आये
उसे क्या पता मैंने उसके लिए
कितने आंसू बहाए
ये अश्रुकड़ गिरते मेरे
ख्वाबों में पाकर उसे
झूम उठते हम ख़ुशी से
देखकर हो जाते मग्न प्रसन्न
आवाज़ में उसकी इतना राग
जैसे कोई वीणा की साज़
गर्व है मुझे वो मेरी बहना है
सबसे अलग वो सर्वप्रिय मीना है /
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