दिनांक ३ -९ -८७
सर्वप्रिय बहना को
ज़िन्दगी के ऐसे मोड़ पर
खड़ी है बहना तू आकर
जहाँ चलना है तुझे हर पल
हिम्मत और सहनशीलता बटोरकर ,
भावुकता को अपनी त्यागकर
चल तू अपनी मंजिल को तय कर
सोच न तू कभी अकेली है
राह तेरी एक अपनी है
मिलेंगे साथी तुझे नए मोड़ पर
चलेंगे साथ तेरे मंजिल के छोर तक
काटे पड़े मिलेंगे फूल बिखरे दिखेंगे
मुस्काना तुम इन फूलो से
मुरझाना न तुम काटों से
अपना दिल हर्षाकर साथी को हर्षाना
चलते चलते तू कभी न घबराना, ज़िन्दगी की राह में
मंजिल एक ऐसी तुझे है पाना
जब , गर्व से कहूँ ख़ुशी से कहूँ
गले लगाकर कहूँ
तू ही है मेरी मीना/
सर्वप्रिय बहना को
ज़िन्दगी के ऐसे मोड़ पर
खड़ी है बहना तू आकर
जहाँ चलना है तुझे हर पल
हिम्मत और सहनशीलता बटोरकर ,
भावुकता को अपनी त्यागकर
चल तू अपनी मंजिल को तय कर
सोच न तू कभी अकेली है
राह तेरी एक अपनी है
मिलेंगे साथी तुझे नए मोड़ पर
चलेंगे साथ तेरे मंजिल के छोर तक
काटे पड़े मिलेंगे फूल बिखरे दिखेंगे
मुस्काना तुम इन फूलो से
मुरझाना न तुम काटों से
अपना दिल हर्षाकर साथी को हर्षाना
चलते चलते तू कभी न घबराना, ज़िन्दगी की राह में
मंजिल एक ऐसी तुझे है पाना
जब , गर्व से कहूँ ख़ुशी से कहूँ
गले लगाकर कहूँ
तू ही है मेरी मीना/
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