दिनांक २६ -११ -८५
प्यारी मम्मी
चली गई मम्मी नानी के घर
डालकर मुसीबत सर पर
खाना हमने बनाया न था कभी
अतः देखिये मेरा हाल अभी
मम्मी का सारा कार्य जान लिया
उसी हिसाब से सारा काम किया
लगता था मानो , जीवन में
भोजन ही सर्वाधिक ज़रूरी है
क्योंकि हम रोरो पकाते थे
पर थूक थूक सब खाते थे
कभी जल गया
कभी मन न हुआ
जो भी हुआ,
हुआ बुरा
मम्मी की याद में हम
आंसू बहाते थे
दिन रात उनके
गुरगान गाते थे //
प्यारी मम्मी
चली गई मम्मी नानी के घर
डालकर मुसीबत सर पर
खाना हमने बनाया न था कभी
अतः देखिये मेरा हाल अभी
मम्मी का सारा कार्य जान लिया
उसी हिसाब से सारा काम किया
लगता था मानो , जीवन में
भोजन ही सर्वाधिक ज़रूरी है
क्योंकि हम रोरो पकाते थे
पर थूक थूक सब खाते थे
कभी जल गया
कभी मन न हुआ
जो भी हुआ,
हुआ बुरा
मम्मी की याद में हम
आंसू बहाते थे
दिन रात उनके
गुरगान गाते थे //
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