Thursday, August 8, 2013

दिनांक २६ -११ -८५

प्यारी मम्मी

चली गई मम्मी नानी के घर
डालकर मुसीबत सर पर
खाना हमने बनाया न था कभी
अतः देखिये मेरा हाल अभी

मम्मी का सारा  कार्य जान लिया
उसी हिसाब से सारा  काम किया
लगता था मानो , जीवन में
 भोजन ही सर्वाधिक ज़रूरी है
क्योंकि हम रोरो पकाते थे
पर थूक थूक सब खाते थे
कभी जल गया
 कभी मन न हुआ
जो भी हुआ,
 हुआ बुरा
मम्मी की याद में हम
आंसू बहाते थे
दिन रात उनके
गुरगान गाते थे //


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