ये कविता मैंने अपने छोटे भाई पर लिखी है
प्यारा भैया
चाँद सा प्यारा भैया मेरा
फूल सा खिल रहे हमेशा
उसका चेहरा
कहता हमेशा " कर दीदी मेरा ये काम"
और खुद करे अपने आराम
दीदी हंसकर कर दे सब और पूछे काम और कब ?
शैतानी के तो अनगिनत रहें
मनमानी तो रहे अटल
पकडे रहे अपनी जिद को
और रुलाते रहें सबको
कितनी प्यारी सी सूरत भैया की
शरारत से चमकता चेहरा
जिसे देख मन खुश हो मेरा
सबका है ये सलोना प्यारा
ये है न्यारा भैया मेरा
प्यारा भैया
चाँद सा प्यारा भैया मेरा
फूल सा खिल रहे हमेशा
उसका चेहरा
कहता हमेशा " कर दीदी मेरा ये काम"
और खुद करे अपने आराम
दीदी हंसकर कर दे सब और पूछे काम और कब ?
शैतानी के तो अनगिनत रहें
मनमानी तो रहे अटल
पकडे रहे अपनी जिद को
और रुलाते रहें सबको
कितनी प्यारी सी सूरत भैया की
शरारत से चमकता चेहरा
जिसे देख मन खुश हो मेरा
सबका है ये सलोना प्यारा
ये है न्यारा भैया मेरा
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