Wednesday, August 7, 2013

ये नहीं कोई हास्य घटना
परन्तु एक घर की  समस्या
ये शायद आपको भी हो
तो आप ही कहो
"दा ई " की समस्या

आई नहीं एक दिन
सारा घर छिन्न भिन्न
हो न सकता हमसे काम
करना तो है सिर्फ आराम

शुरू करना पड़ा हमे बरतन साफ़
छिल गए सारे हाथ आज
कपड़ो को घिसते घिसते फिर वही दाग दिखते
हमसे तो कभी न मिटते

झाड़ू तो मानो सार घर
बना था फिर भी कूड़ाघर
लगे हम जमीन पोछने
और लगे यही सोचने
काश दा ई आ जाती
वही सब कर पाती
और हमे न रुलाती //




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