Friday, July 12, 2013

दिन्नांक चौबीस जनवरी छयासी


मान गए हम ,मान जाइए आप
करना ही पड़ेगा आपको यकीन
यही कि मम्मी है मेरी एक
चलती फिरती कामकाजी मशीन

सूर्योदय से पहले  सोकर उठती हैं
फिर र्सुबह का स्वागत शांत दिमाग से करती हैं ,
पलक झपकते ही सबके लिए गरम गरम "बेड टी" हाज़िर करती हैं ,
सबको सोते देखकर मन  गुस्से में उबलता है
जैसे कोई ज्वाला मुखी फटने से पहले , हौले हौले  खौलता है

परन्तु, परन्तु उस समय उनका मुंह बंद रहता है
फिर तो पापा जी मम्मी की  बडबड से डरकर
दूध का डिब्बा लेकर ,लम्बी दौड़ लगा पड़ते हैं
थोड़ी ही देर में दूध हाज़िर कर देते है

मम्मी का चेहरा शांत देखकर
मुख पर मुस्कान ले आते है
परतु वो मुस्कान पल भर के लिए ही होती है
क्योंकि मम्मी अचानक गुस्से में फड़कती हैं

खाना बनाकर , गुस्सा मिलाकर , तीखी चिल्लाहट के साथ
टिफ़िन का डब्बा पकडाती हैं
 और फिर देखिये तो उनके बच्चो  की शामत  आती है

बच्चे उनके इतने आलसी की पूछिए मत
कामचोर और आलसीपने की भी होती है हद
वे बिस्तर पर विराजमान रहकर
मम्मी के कार्यो का नज़ारा देखकर ,
जुम्हाई लेते हैं और वे बिस्तर पर पड़े पड़े नींद को ही बेहतर कार्य समझते है

बस यहीं मशीन तेज़ी से चालू  होती है
 मम्मी बस एक ही आवाज़ में एक ही सुर में चिल्ला चिल्ला कर सारे
काम कर डालती है

एक काम करती हैं दुगुना चिल्लाती है
मानो डांट  से मम्मी रुपी मशीन चलती है
सुबह का कार्य निबटा कर सज सवर कर अवश्य बैठती हैं
बस आईने के सामने ही एक खूबसूरत मुस्कराहट पेश करती हैं

हम तो उनको मुस्कुराते देख कभी कभी ही देखते हैं
परतु फिर अचानक डांट  खाने के लिए तैयार रहते हैं

फिर मम्मी का योगाभ्यास शुरू हो जाता है
आधे ही घंटे  में पूरा अभ्यास हो जाता है
किसी को पता ही नहीं चलता और दोपहर का खाना तैयार हो जाता है
परन्तु  उस समय गुस्से की मिलावट कम होती है क्योंकि
योग करने से दिमाग की शान्ति होती है

शाम हो जाती है लालिमा छा जाती है
मम्मी मेरी सज सवर कर बैठ जाती है
क्लब में इनाम पाने के लिए वो जल्दी क्लब के लिए पापा साथ
रवाना हो जाती है
वापस आकर , मुस्कुराकर,फिर किचन में घुस जाती हैं
बिना कहे कुछ खाना बनाकर ले आती हैं

इस समय तो मुख पर शांत झलगता है
परन्तु घर  में सबका दिल तब भी धड़कता है
मशीन  अब थककर चूर हो जाती है
उसे शायद आराम की महसूस होती है
इसलिए वो गहरी निद्रा में हो जाती हैं
पर इतना ही नहीं नींद में भी वो काम करने का कवाब देखती है , फिर रात में एकाएक
हडबडा कर उठ जाती हैं, यही कहती है
मुझे काम करना है

अरे मम्मी इतना भी क्या काम
अरे ज़िन्दगी में करना ही है तो
फिर मौज मस्ती करो आराम
ये शब्द उनकी ही बेटी , हिम्मत के साथ उनको कहती है



 

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