आज भी अपना बोकारो याद आता है
बोकारो शहर का नाम जब भी जुबान पर है आता
यक़ीनन हमारा मंन वापस उन यादों में, उलझ है जाता
सुबह सुबह कोयल का कूकना ,
खुली सड़क पर स्वच्छ हवा मह्सूस करना ,
सभी पहचानते चेहरों को नित्य देखना,
सारा शहर अपना अपना सा लगना ,
आज भी अपना बोकारो याद आता है
बचपन में सिटी पार्क की ट्रेन में घूमना ,
नए साल पर अक्सर पिकनिक मनाना ,
राम मंदिर में ' लिमका ' में खाना खाना।
घूमते घूमते ठेले पर की चाट खाना ,
आज भी अपना बोकारो याद आता है
पापा मम्मी के साथ स्कूटर पर क्लब जाना ,
वहां झूलों पर झूलना , पचास पैसे के फिंगर चिप्स खाना ,
पिक्चर में लम्बी बेंचों पर सीट के लिए झगडना ,
इंटरवल में गीले गीले दोसे का मज़ा लेना ,
आज भी अपना बोकारो याद आता है
बेधड़क साइकिल पर घूमना ,
गेट पर से दोस्तों का आवाज़ लगाना
दौड़ते भागते पूरी स्ट्रीट में छुप्पन छुपाई खेलना ,
आते जाते सभी बड़ो को नमस्ते करना
आज भी अपना बोकारो याद आता है
सबके घर एक जैसे ही दिखना ,
' रैफेल टिकट 'लेकर सबका दरवाज़ा खटखटाना
'एक रुपये 'में टिकट बेचकर
ख़ुशी ख़ुशी घर को जाना
आज भी अपना बोकारो याद आता है
संत जेवियर्स से पढ़कर ये जाना
सबसे समर्पित अपने टीचर्स को माना,
रिश्ता बच्चो से ऐसा बनाया
अब भी उनका हाथ सर पर है पाया
आज भी अपना बोकारो याद आता है
पापा मम्मी को धन्यवाद हमारा
बोकारो को हमारा बचपन जो बनाया
दुनिया के किसी भी कोने में हम जाते
बोकारो का मित्र जरूर हम है पाते
आज भी अपना बोकारो याद आता है
समय था वह एक , जो बीत गया
यादें वह एक खूबसूरत बनकर रह गया
दोस्तों , हम सबने ये बात जानी है कि
'बोकारो 'शब्द ही एक पूरी कहानी है
आज भी अपना बोकारो याद आता है
आज भी अपना बोकारो याद आता है 1
- अंशु सिन्हा
यक़ीनन हमारा मंन वापस उन यादों में, उलझ है जाता
सुबह सुबह कोयल का कूकना ,
खुली सड़क पर स्वच्छ हवा मह्सूस करना ,
सभी पहचानते चेहरों को नित्य देखना,
सारा शहर अपना अपना सा लगना ,
आज भी अपना बोकारो याद आता है
बचपन में सिटी पार्क की ट्रेन में घूमना ,
नए साल पर अक्सर पिकनिक मनाना ,
राम मंदिर में ' लिमका ' में खाना खाना।
घूमते घूमते ठेले पर की चाट खाना ,
आज भी अपना बोकारो याद आता है
पापा मम्मी के साथ स्कूटर पर क्लब जाना ,
वहां झूलों पर झूलना , पचास पैसे के फिंगर चिप्स खाना ,
पिक्चर में लम्बी बेंचों पर सीट के लिए झगडना ,
इंटरवल में गीले गीले दोसे का मज़ा लेना ,
आज भी अपना बोकारो याद आता है
बेधड़क साइकिल पर घूमना ,
गेट पर से दोस्तों का आवाज़ लगाना
दौड़ते भागते पूरी स्ट्रीट में छुप्पन छुपाई खेलना ,
आते जाते सभी बड़ो को नमस्ते करना
आज भी अपना बोकारो याद आता है
सबके घर एक जैसे ही दिखना ,
' रैफेल टिकट 'लेकर सबका दरवाज़ा खटखटाना
'एक रुपये 'में टिकट बेचकर
ख़ुशी ख़ुशी घर को जाना
आज भी अपना बोकारो याद आता है
संत जेवियर्स से पढ़कर ये जाना
सबसे समर्पित अपने टीचर्स को माना,
रिश्ता बच्चो से ऐसा बनाया
अब भी उनका हाथ सर पर है पाया
आज भी अपना बोकारो याद आता है
पापा मम्मी को धन्यवाद हमारा
बोकारो को हमारा बचपन जो बनाया
दुनिया के किसी भी कोने में हम जाते
बोकारो का मित्र जरूर हम है पाते
आज भी अपना बोकारो याद आता है
समय था वह एक , जो बीत गया
यादें वह एक खूबसूरत बनकर रह गया
दोस्तों , हम सबने ये बात जानी है कि
'बोकारो 'शब्द ही एक पूरी कहानी है
आज भी अपना बोकारो याद आता है
आज भी अपना बोकारो याद आता है 1
- अंशु सिन्हा
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