Monday, July 29, 2013

आदरनिये पापा जी एवं मम्मी जी को 


खुशियों का उपहार लेकर आयी है तीन फर  वरी ,
मनाने मेरे पापा मम्मी की मैरिज एनिवर्सरी
हर्षोल्लास को बटोर कर आज
बीते हुए समय को कर रहे है याद
हो गए शादी के आज पूरे १८ साल
लिख रहीं हूँ  मैं पापा मम्मी के गुरगान
और आज तक मैंने जितना कुछ जाना
मैंने इन्ही पन्नो पर है लिख डाला
आयिए मिलवाए हम अपने  पापा मम्मी से
फिर पूछिए आप सवाल कोई इनसे,
मम्मी मेरी इतने दयावान
की हर कोई दे इनको, सम्मान ,
और खाए जो इनके हाथों का पकवान
देखिये अगले दिन वही सज्जन यहाँ विराजमान
पर मम्मी की आदत जो गन्दी
झूठ बोलना जो कभी न सीखी ,
घर की कोई भी बात ,जब आ जाये इनके बाज
खोल दे तुरंत  उस ताले का राज़
हिम्मत इनकी है ज्यादा लगती सबसे
कौन करेगा मुकाबला इनसे
बिना डरे कुछ बोलती है , करती है,
और कुछ बिगड़ जाने पर भी उसी काम की ही ज़बरदस्ती है \
आयिए मिलवाए अपने पापाजी से ,
परतु ध्यान से ,
उन्हें तंग न करें , वो अभी है कुछ काम में जुटे
इनकी तो तारीफ ही कीजिये
क्योंकि घर के सभी काम सीखिये
 और अपनी बचत कीजिये \
हैं वैसे पापा कंजूस बहुत
पर घर में मम्मी जो है खर्चालू
सीखो पहले इनसे धीरज रखना
फिर सभी काम आराम से करना
घर पर बैठे हमेशा समझाते रहते
अपने बच्चो को उनकी गलती का एहसास दिलाते
तभी तो कितने सीधे  है इनके बच्चे
जो कभी नहीं पापा से डरते
हाँ पापा को गुस्सा ज़रा जल्दी आता है
पर खुद उनको इसका एहसास होता  है
और अतः जल्दी छू मंतर  हो जाता है
मेरे पापा मम्मी है कितने अच्छे
मेरे जितने भी है भाव व्यक्त होते
लिख डाले है मैंने आज कुछ
एक कविता ही बनाके /

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